जूली आंटी के ढाबे पर में खाना खाता था. शाम को मेरे पास करने को कुछ होता नहीं था. तो बहुत देर तक उन के ढाबे पर ही बैठा रहता था. इंजीनियरिंग कर रहा था. तो अपने

जूली आंटी के ढाबे पर में खाना खाता था. शाम को मेरे पास करने को कुछ होता नहीं था. तो बहुत देर तक उन के ढाबे पर ही बैठा रहता था. इंजीनियरिंग कर रहा था. तो अपने
