देसी भाभी का देसी बदन
गांव में अकसर सारी औरतें या तो भाभी होती या माँ के बराबर वाली आंटी. ऐसी ही एक भाभी थी मेरे गांव में. उनके पति उनको छोड़ कर विदेश में नौकरी करने चले गये थे. २ से
गांव में अकसर सारी औरतें या तो भाभी होती या माँ के बराबर वाली आंटी. ऐसी ही एक भाभी थी मेरे गांव में. उनके पति उनको छोड़ कर विदेश में नौकरी करने चले गये थे. २ से
महेश भाई को कई साल हो गए थे काम करते हुए उस मंस में. कितनी ही बार वो बाहर विदेश में रह कर आ गए थे. कंपनी को प्रोफिर भी बहुत दिया था. लेकिन
मुझ में और मेरी बहन की उम्र में सिर्फ २ साल का अंतर था. जब मैं जवान हुआ
सविता भाभी हम लोगो के ऑफिस में थी. लाला जी
सब कुछ अच्छा चल रहा था और मेरे मन में मेरी बहन राधिका के लिए कुछ भी गलत नहीं था. लेकिन
पूजा नाम था उसका. एक नंबर की हरामी लड़की थी वो. मुझे नहीं पता था